RPwD Act, 2016
1. अधिनियम का नाम, वर्ष और प्रवर्तन (Title, Year & Commencement)
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अधिनियम का नाम: The Rights of Persons with Disabilities Act, 2016
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अधिनियम संख्या: Act No. 49 of 2016
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राष्ट्रपति की स्वीकृति: 27 दिसम्बर 2016
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प्रवर्तन तिथि (Commencement):
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19 अप्रैल 2017 (अधिसूचना द्वारा)
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“This Act gives effect to the United Nations Convention on the Rights of Persons with Disabilities.”
2. पृष्ठभूमि (Background)
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UN Convention on the Rights of Persons with Disabilities (UNCRPD):
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अपनाया गया: 13 दिसम्बर 2006
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भारत द्वारा अनुमोदन (Ratification): 1 अक्टूबर 2007
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RPwD Act, 2016 इसी अंतरराष्ट्रीय दायित्व को लागू करने हेतु बनाया गया।
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इस अधिनियम ने Persons with Disabilities Act, 1995 को निरस्त (Repeal) किया।
3. अधिनियम का दृष्टिकोण (Approach of the Act)
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यह अधिनियम कल्याणकारी (Welfare-based) नहीं बल्कि
अधिकार-आधारित (Rights-based) है। -
दिव्यांगता को सामाजिक निर्माण (Social Construct) के रूप में देखता है।
4. दिव्यांगता की परिभाषा (Section 2 – Important Definitions)
(i) दिव्यांग व्यक्ति (Person with Disability)
ऐसा व्यक्ति जिसे दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या संवेदी अक्षमता हो, जो सामाजिक बाधाओं के साथ मिलकर उसकी समाज में पूर्ण और प्रभावी भागीदारी को बाधित करे।
(ii) बेंचमार्क दिव्यांगता (Benchmark Disability)
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कम से कम 40% दिव्यांगता
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प्रमाणित होना अनिवार्य
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विशेष लाभ, आरक्षण एवं सुविधाएँ इसी श्रेणी को मिलती हैं
(iii) उच्च समर्थन आवश्यकता (High Support Needs)
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दैनिक जीवन, निर्णय लेने, शिक्षा, रोजगार हेतु गहन सहायता की आवश्यकता
(iv) समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)
दिव्यांग और गैर-दिव्यांग छात्र एक साथ पढ़ें, तथा शिक्षण प्रणाली उनकी आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित हो।
(v) युक्तिसंगत सुविधा (Reasonable Accommodation)
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बिना अत्यधिक बोझ डाले आवश्यक संशोधन
5. मान्यता प्राप्त दिव्यांगताओं की संख्या
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1995 अधिनियम: 7 प्रकार
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2016 अधिनियम: 21 प्रकार की दिव्यांगताएँ
👉 यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य है।
6. अधिकार और अधिकारिता (Chapter II : Sections 3–15)
धारा 3 – समानता एवं भेदभाव निषेध
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कानून के समक्ष समानता
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केवल दिव्यांगता के आधार पर स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता
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युक्तिसंगत सुविधा देना सरकार का दायित्व
धारा 4 – दिव्यांग महिलाएँ और बच्चे
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महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा
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बच्चों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार
धारा 5 – सामुदायिक जीवन
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संस्थानों में रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता
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समुदाय में स्वतंत्र जीवन का अधिकार
धारा 6–7 – क्रूरता, शोषण और हिंसा से संरक्षण
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शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और यौन शोषण से सुरक्षा
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कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा:
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बचाव
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संरक्षण
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पुनर्वास
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धारा 9 – घर और परिवार
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केवल दिव्यांगता के कारण बच्चे को माता-पिता से अलग नहीं किया जा सकता
धारा 10 – प्रजनन अधिकार
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बिना सहमति नसबंदी निषिद्ध
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परिवार नियोजन जानकारी का अधिकार
धारा 11 – मतदान की सुलभता
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मतदान केंद्र दिव्यांग-अनुकूल
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सामग्री सरल और सुलभ
धारा 12 – न्याय तक पहुँच
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अदालतों में सुलभता
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निःशुल्क कानूनी सहायता
धारा 13–14 – विधिक क्षमता और सीमित संरक्षकता
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दिव्यांग व्यक्ति को कानूनन निर्णय लेने का अधिकार
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Limited Guardianship:
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संयुक्त निर्णय प्रणाली
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सीमित समय और परिस्थिति हेतु
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7. शिक्षा (Chapter III : Sections 16–18)
धारा 16 – शैक्षणिक संस्थानों का कर्तव्य
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बिना भेदभाव प्रवेश
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बाधारहित भवन
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ब्रेल, सांकेतिक भाषा
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प्रारंभिक पहचान (Early Detection)
धारा 17 – विशेष उपाय
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प्रत्येक 5 वर्ष में सर्वेक्षण
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18 वर्ष तक:
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निःशुल्क पुस्तकें
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सहायक उपकरण
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परीक्षा सुविधाएँ:
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अतिरिक्त समय
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लेखक (Scribe)
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भाषा छूट
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धारा 18 – वयस्क शिक्षा
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आजीवन शिक्षा में समान भागीदारी
8. रोजगार और कौशल विकास (Chapter IV : Sections 19–23)
सरकारी रोजगार
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4% आरक्षण:
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1% – दृष्टिबाधित
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1% – श्रवण बाधित
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1% – गतिशील दिव्यांगता
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1% – बौद्धिक/मानसिक
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उच्च शिक्षा
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5% सीट आरक्षण
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5 वर्ष की आयु सीमा छूट
सेवा सुरक्षा
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नौकरी के दौरान दिव्यांग होने पर:
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सेवा समाप्त नहीं
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समान वेतन पर समायोजन
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9. सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य (Chapter V)
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दिव्यांग पेंशन
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स्वास्थ्य सेवाएँ
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बीमा योजनाएँ
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पुनर्वास
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खेल, संस्कृति और मनोरंजन
10. उच्च समर्थन आवश्यकता वाले दिव्यांग (Chapter VII)
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मूल्यांकन बोर्ड द्वारा आवश्यकता निर्धारण
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व्यक्तिगत सहायता
11. सरकारों के कर्तव्य (Chapter VIII)
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जागरूकता अभियान
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परिवहन, ICT, भवनों की सुलभता
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5 वर्ष में सार्वजनिक भवन सुलभ
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2 वर्ष में सेवा प्रदाता सुलभता
12. प्रमाणन एवं संस्थागत तंत्र
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दिव्यांगता प्रमाणपत्र पूरे भारत में मान्य
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केंद्रीय व राज्य सलाहकार बोर्ड
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मुख्य आयुक्त एवं राज्य आयुक्त
13. अपराध और दंड (Chapter XVI)
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झूठे लाभ पर दंड
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शोषण पर कठोर सजा
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विशेष न्यायालय
निष्कर्ष (Exam-ready Conclusion)
“The Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 is a landmark legislation that shifts India from a charity-based to a rights-based approach, ensuring equality, dignity, accessibility and full participation of persons with disabilities.”
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